तीर्थंकर महावीर स्वामी जी

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जब भी किसी से मिलो, तब प्यार से बोलो-जय जिनेन्द्र !

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28 जुलाई 2011

कौन होता है आदर्श जैन?


यह फोटो मेरी दस साल की भतीजी
ने मेरे मोबाईल से ले रखी है. मुझे  इसके
बारें में कुछ दिन पहले ही  जानकारी 
हुई. जब अपने  म्मोरी कार्ड को
कम्प्युटरसे जोड़ा और देखकर हैरान हो
गया कि इतनी अच्छी फोटो ली हुई है..

"जैन" कोई जाति नहीं, धर्म है. जैन-धर्म के सिध्दांतों में जो दृढ विश्वास रखता है और उनके अनुसार आचरण करता है, वही सच्चा जैन कहलाता है. जैन का जीवन किस प्रकार से आदर्श होना चाहिए, यह प्रस्तुत प्रकरण में दिखाया गया है.

1. जो सकल विश्व की शान्ति चाहता है, सबको प्रेम और स्नेह की आँखों से देखता है, वही सच्चा जैन है.


2. जो शान्ति का मधुर संगीत सुनाकर सबको ज्ञान का प्रकाश दिखलाता है, कर्त्तव्य-वीरता का डंका बजाकर प्रेम की सुगंध फैलाता है, अज्ञान और मोह की निंदा से सबको बचाता है, वही सच्चा जैन है.


3. ज्ञान, चेतना की गंगा बहाने वाला मधुरता की जीवित मूर्ति कर्त्तव्य-क्षेत्र का अविचल वीर योध्दा है, वही सच्चा जैन है.


4. जैन का अर्थ अजेय है, जो मन और इन्द्रियों के विकारों को जीतने वाला, आत्म-विजय की दिशा में सतत सतर्क रहने वाला है, वही सच्चा जैन है.


5. 'जैनत्व' और कुछ नहीं आत्मा की शुध्द स्थिति है. आत्मा को जितना कसा जाए, उतना ही जैनत्व का विकास. जैन कोई जाति नहीं धर्म है. न किसी भी देश, पन्थ और जाति का है. कोई आत्म-विजय के पथ का यात्री है, वही सच्चा जैन है.


6. जैन बहुत थोडा, परन्तु मधुर बोलता है, मानो झरता हुआ अमृतरस हो! उसकी मृदु वाणी,कठोर-से कठोर ह्रदय को भी पिघला कर मक्खन बना देती है! जैन के जहाँ भी पाँव पड़ें, वहीँ कल्याण फैल जाए! जैन का समागम, जैन का सहचार सबको अपूर्व शांति देता है! इसके गुलाबी हास्य के पुष्प, मानव जीवन को सुगन्धित बना देते हैं! उसकी सब प्रवृत्तियां, जीवन में रस और आनंद भरने वाली है, वही सच्चा जैन है.


7. जैन गहरा है, अत्यंत गहरा है. वह छिछला नहीं, छिलकने वाला नहीं. उसके ह्रदय की गहराई में,शक्ति और शांति का अक्षय भंडार है. धैर्य और शौर्य का प्रबल प्रवाह है.जिसमें श्रध्दा और निर्दोष भक्ति की मधुर झंकार है, वही सच्चा जैन है.


8. धन वैभव से जैन को कौन खरीद सकता है? धमकियों से उसे कौन डरा सकता है? और खुशामद से भी कौन उसे जीत सकता है? कोई नहीं, कोई नहीं. सिध्दांत के लिए काम पड़े तो वह पल-भर में स्वर्ग के साम्राज्य को भी ठोकर मार सकता है. 
9. जैन के त्याग में दिव्य-जीवन की सुगंध है. आत्म-कल्याण और विश्व-कल्याण का विलक्षण मेल है. जैन की शक्ति, संहार के लिए नहीं है. वह तो अशक्तों को शक्ति देती है, शुभ की स्थापना करती है और अशुभ का नाश करती है. सच्चा जैन पवित्रता और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए मृत्यु को भी सहर्ष सानन्द निमंत्रण देता है. जैन जीता है, आत्मा के पूर्ण वैभव में और मरता भी है वह आत्मा के पूर्ण वैभव में.
10.  जैन की गरीबी में संतोष की छाया है. जैन की अमीरी में गरीबों का हिस्सा है.


11.  जैन आत्म-श्रध्दा की नौका पर चढ़ कर निर्भय और निर्द्वन्द्व भाव से जीवन यात्रा करता है.विवेक के उज्जवल झंडे के नीचे अपने व्यक्तित्व को चमकता है. राग और द्वेष से रहित वासनाओं का विजेता 'अरिहंत' उसका उपास्य है. हिमगिरी के समान अचल एवं अडिग जैन दुनिया के प्रवाह में स्वयं न बहकर दुनियां को ही अपनी ओर आकृष्ट करता है. मानव-संसार को अपने उज्जवल चरित्र से प्रभावित करता है.अतएव एक दिन देवगण भी सच्चे जैन की चरण-सेवा में सादर सभक्ति मस्तक झुका देते हैं?


12.  जैन बनना साधक के लिए परम सौभाग्य की बात है. जैनत्व का विकास करना, इसी में मानव-जीवन का परम कल्याण है.
"राष्ट्र" संत-उपाध्याय कवि श्री अमर मुनि जी महाराज द्वारा लिखित "जैनत्व की झाँकी" से साभार

2 टिप्‍पणियां:

  1. सुंदर आलेख के लिए बधाई!
    रमेश जी,
    आप हर विषय के लिए एक नया ब्लाग बना लेते हैं। एक नए ब्लाग पर लोग मुश्किल से आते हैं। उन्हें लाने के लिए अनेक प्रयत्न करने पड़ते हैं। यह वैसे ही है कि आप जमीन पर छोटी छोटी झोपड़ियाँ बना ले। फिर एक में पिता. दूसरी में माता,तीसरी में एक बेटा, चौथी में दूसरा बेटा, पाँचवीं में एक बेटी ...... रहने लगे।
    इस से जमीन बेकार हुई, सब अलग अलग रहे, जीवन बिखर गया।
    इस से अच्छा होता एक अच्छा मकान बनाते उसी में मंजिलें बनाते। सब साथ रहते। सब की पहचान भी एक परिवार सी बनी रहती।
    मेरा तो आप से आग्रह है कि आप अपने सब ब्लागों की सब पोस्टों को एक साथ इकट्ठा कर दें। उन में से समय के साथ बेकार हो चुकी पोस्टें मिटा दें। एक ही ब्लाग रहने दें। उसी पर काम करें। अन्य ब्लागों को अभी सुप्त रहने दें। यदि आप को एक ब्लाग पर ही काम करने से परिणाम अच्छे मिलें तो उसे ही रखें. अन्य को मिटा दें।

    इसी पोस्ट को देखें इस पर कितने लोग आए हैं और आएंगे? यदि आप अपने पुराने ब्लाग पर ही इस पोस्ट को डालते तो अनेक अब तक पढ़ चुके होते।

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जय जिनेन्द्र!!! अगर आप तीर्थंकर महावीर स्वामी जी ब्लॉग पर आपका स्वागत है. सभी जैन बंधुओं! यह ब्लॉग आप सभी भाईयों का अपना ब्लॉग है. इसकी गलतियों (दोषों व कमियों) को सुधारने के लिए मेहरबानी करके मुझे सुझाव दें. मैं आपका आभारी रहूँगा. मेरा प्रसास अच्छा है या बुरा. अपने विचार व्यक्त करके मेरा मार्गदर्शन करें.

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